विद्यालय की स्थापना एक महान देश भक्त जनसेवक सरल एवं निश्छल ,ईश्वर भक्त ,महामानव स्वर्गीय डॉक्टर महेश्वर सहाय की पुण्य स्मृति में माँ भागीरथी के पावन पुलिन तट पर १६ अगस्त १९४९ को एक पुस्तकालय के रूप में हुआ। इसका उद्घाटन डॉक्टर मंगला प्रसाद अग्निहोत्री ( एम. ए.पी.एच .डी) ने किया। गाँधी जयंती के अवसर पर २ अक्टूबर १९५० को पुस्तकालय का नाम बदलकर श्री महेश विद्या मंदिर हो गया। प्राइमरी स्कूल के रूप में संचालित हुआ जिसका उद्घाटन २ अक्टूबर १९५० को तत्काल एम .एल.ए . श्री गंगा सहाय चौबे ने किया।
प्रांरभमें यह विद्यालय डॉ मेहर प्रसाद के गैराज में चलता था बाद में छावनी बोर्ड से भूमि प्राप्त करके विद्यालय का भवन निर्माण प्रांरभ हुआ जिसका शिलान्यास नगर के यशस्वी जन सेवी एवं तत्कालीन एम . पी . श्री शिव नारायण टंडन द्वारा दिनाक १५ अगस्त १९५४ को हुआ पहले यह भवन २४०० वर्ग फ़ीट भूमि पर बना बाद में इसका विस्तार हुआ और अब यह विद्यालय वर्ग फ़ीट पर ३० बड़े कमरों और एक सभागार के साथ संचालित है
यह विद्यालय आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित भौतिक विज्ञानं ,रसायन विज्ञानं जीव विज्ञानं और भूगोल का प्रयोगशालाओ के साथ पूर्व शिक्षा के कार्य में लगा हुआ है विद्यालय सरकारी सहायता प्राप्त है सर्कार द्वारा नियत फीस ही छात्र / छात्राओंसे ली जाती है विद्यालय में उ.प्र .माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड द्वारा चयनित योग कर्मठ अनुशासन प्रिय शिक्षकों द्वारा अध्यापन कार्य किया जाता है विद्यालय कक्षा १ से लेकर कक्षा १२ तक की शिक्षा प्रदान की जाती है
विद्यालय की मान्यता
प्रायमरी विभाग १४/१२/१९५०
जूनियर विभाग 1966
हाई स्कूल साहित्यिक वर्ग १९६७
हाई स्कूल वैज्ञानिक वर्ग १९७२
इंटरमीडिएड साहित्यिक वर्ग १९७९
अनुदान सूचि में १९७०
